कर्म ही पूजा है कविता karm hi pooja hai hindi poem

karm hi pooja hai hindi poem

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, दोस्तों वास्तव में कर्म ही पूजा है हम सभी को अपना कर्म पूजा समझकर करना चाहिए जिस तरह से हम पूजा एक विश्वास के साथ करते हैं उसी तरह से हमें विश्वास के साथ कर्म को पूजा समझकर करना चाहिए क्योंकि कर्म ही पूजा है।

karm hi pooja hai hindi poem
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यदि हम कर्म करते हैं तो उसका परिणाम भी हमें अवश्य मिलता है आज हम आपके लिए लाएं हैं दीनदयाल शर्मा जी द्वारा लिखित कर्म ही पूजा है पर एक कविता आप इसे जरूर पढ़ें तो चलिए पढ़ते है आज की इस कविता को

कितना सारा काम करूं मैं

फिर भी गधा कहाता

किससे कहूं मैं पीड़ा अपनी

किसे नियम बतलाता

 

लादो चाहे कितना बोझा

चुपचाप लदवाता

मैं भी करूं आराम कभी तो

मन में मेरे आता

 

शीतल अष्टमी के दिन केवल

अपनी सेवा पाता

बाकी दिन में मेहनत करता

नजर न कभी चुराता

 

खाना जैसा देते मुझको

चुपचाप में खाता

शिकवे शिकायत कभी ना करता

नखरे ना दिखलाता

 

मैं जिसकी करता हूं सेवा

समझूं उसको दाता

कर्म करूं गीता भी कहती

कर्म से मेरा नाता

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