अब पछताए होत क्या जब चिड़िया स्टोरी ab pachtaye hot kya jab chidiya story in hindi

Ab pachtaye hot kya jab chidiya story in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी, दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत पर कहानी. दोस्तों हमारी आज की कहानी आपको एक बहुत बड़ी सीख देने वाली हैं हम जीवन में जब भी कुछ गलत करते हैं तो हमें पछताना जरूर पड़ता है तो चलिए पढ़ते हैं आज की इस कहानी को।

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राहुल अपने मां बाप का इकलौता बेटा था उसके मां-बाप एक सरकारी कर्मचारी थे उनकी अच्छी आमदनी होती थी. राहुल के पिता ने राहुल को पढ़ाने के लिए अच्छे स्कूल में दाखिला दिलवाया। राहुल भी पढ़ने में होशियार था वह पढ़ता गया आगे बढ़ता गया और आगे उसने अच्छी पढ़ाई की और वह भी एक सरकारी कर्मचारी बन गया वह महीने में अच्छा खासा कमा लेता था लेकिन उसकी एक आदत थी जो बहुत ही बुरी आदत थी जिस वजह से उसके मां-बाप और उसकी बीवी बहुत पछताते थे दरहसल राहुल रोजाना शराब पीता था जिस वजह से वह जितना कमाता था उसकी आधी सैलरी तो उसकी शराब में चली जाती थी. मां बाप, बीवी सब उसको समझाते थे लेकिन उसको कुछ भी समझ में नहीं आता था आगे चलकर खर्चा बढ़ने लगा और राहुल की सैलरी के कुछ ही पैसे उसके हाथ आ पाते थे।

राहुल के पिता का बहुत पहले ही रिटायरमेंट हो चुका था अब राहुल की आमदनी से ही घर का खर्चा चल रहा था लेकिन कुछ समय बाद घर में लड़ाई झगड़े होने लगे और आखिर में राहुल और राहुल की पत्नी ने अपने मां-बाप को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया, उनका खर्चा उठाने से इनकार कर दिया जिस वजह से राहुल के माता-पिता पास में ही एक किराए का कमरा लेकर रहने लगे. एक दिन किसी बीमारी की वजह से राहुल के पिता हॉस्पिटल में भर्ती थे उनको खून की जरूरत थी लेकिन उनके पुत्र राहुल को ये बात पता लगी तो वह हॉस्पिटल में देखने भी नहीं आया खून देने की बात तो अलग ही थी. बेचारे राहुल के माता-पिता को बहुत दुख हुआ वह जिंदगी और मौत के बीच में लड़ रहे थे लेकिन किसी सज्जन ने उन्हें खून दे दिया और उनकी जान बच गई। राहुल का परिवार भी बढ़ रहा था उसकी तीन बच्चे थे दो लड़के और एक लड़की वह भी धीरे-धीरे बड़े होने लगे. बच्चे अपने मां-बाप से पूछने लगे कि दादा दादी हमारे साथ क्यों नहीं रहते तो उनके मां-बाप के पास कोई जवाब नहीं होता राहुल के बच्चे अपने मां-बाप की आदतों से सीख लेते रहते।

राहुल अपने मां-बाप से बात तक नहीं करता था कुछ दिनों बाद राहुल के मां-बाप पास के ही एक दूसरे शहर में किराए का कमरा लेकर रहने लगे बेचारे दोनों बुजुर्ग को थोड़ी-बहुत पेंशन मिलती जिससे वह अपना खर्चा चलाते, वह अपने घर का काम खुद करते। कुछ समय बाद उन दोनों की मौत हो गई इधर राहुल के बच्चे भी बड़े बड़े हो चुके थे राहुल ने अपने बच्चों की शादी की. राहुल ने देखा कि उसके बच्चे सिर्फ महीने भर में ही उससे अलग हो चुके है. राहुल को वैसे भी शराब की आदत थी जिस वजह से उसने पूरा पैसा शराब में ही बर्बाद कर दिया था उसने अपने बच्चों के लिए एक घर तक नहीं बनवाया था, उसने अपने जीवन में कोई भी उन्नति नहीं की थी उसके बच्चों का कहना था कि जिस बाप ने हमारे लिए कुछ भी नहीं किया हो हम उसके लिए क्यों कुछ करें उसके दोनों बच्चे उसी मकान में अलग रहने लगे और उन्होंने भी अपने माता पिता को घर से बाहर निकाल दिया।

अब राहुल को अपनी पुरानी बातें याद आने लगी सोचने लगा कि मैंने भी अपने मां-बाप को घर से बाहर निकाल दिया था. राहुल और राहुल की पत्नी भी दर-दर ठोकरें खाने के लिए भटकने लगे उनकी मदद करने के लिए कोई भी आगे नहीं आया उनको जीवन में पछताने के सिवा कोई उपाय नहीं सूझा। कुछ दिनों बाद राहुल हॉस्पिटल में भर्ती था राहुल की किडनी खराब होने की वजह से कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो गई राहुल तड़प तड़प के मर गया. मरते समय उसको बहुत पछतावा हुआ वह समझ चुका था कि इंसान को अपने कर्मों की सजा इसी जन्म में मिलती है उसको और उसकी बीवी को जीवन में बहुत पछताना पड़ा तो दोस्तों मैं आपको इस कहानी से बस यही सीख देना चाहता हूं कि आप कभी भी ऐसा कार्य न कीजिए जिससे आपको जीवन में पछताना पड़े और पछताने के बाद भी आप के हाथ कुछ भी ना लगे।

राहुल के बच्चे शुरू से ही वह सब देख रहे थे, समझ रहे थे क्योंकि संस्कार सिर्फ बताने से नहीं आते संस्कार अपनाने से आते हैं अगर हम अच्छे कार्य करते हैं तो हमारे बच्चे भी कुछ अच्छा ही सीखते हैं लेकिन अगर हम कुछ गलत करते हैं तो हमारे बच्चे गलत ही सीखते हैं हम कितना भी सिखाएं लेकिन बच्चे मानते नहीं हैं. अगर हम गलत नहीं करते तो बच्चों पर कुछ भी गलत प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए पैसा कमाने से ज्यादा संस्कारो पर फोकस कीजिए तभी आपके बच्चे कुछ अच्छा सीख पायेंगे। अगर आप किसी के साथ बुरा करोगे तो आपके साथ भी बुरा होगा इसलिए जीवन में हमेशा अच्छा कीजिए अपने मां-बाप को खुश रखें और जीवन में खुश रहिए।

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