लालची व्यक्ति

दोस्तों काफी समय पहले की बात है कि एक राज्य में एक जमींदार रहता था उस राज्य में एक व्यक्ति भी रहता था जो बहुत ही लालची और लंबी लंबी बाते करने वाला था लेकिन वो करता कुछ नही था वह हमेशा शराब पीकर गांव वालों से कुछ न कुछ कहता रहता था।

एक दिन वह गांव वालों से कह रहा था कि अगर मेरे पास बहुत सी जमीन होती तो मैं वह जमीन आप लोगों को दे देता और आपकी तनख्वाह भी बढ़ा देता यह सुनकर गांव वासियों को भी अच्छा लगता था एक दिन गांव के जमींदार ने उस व्यक्ति को बुलाया और कहा की राधेश्याम आज तुम जितना ज्यादा दोड़ोगे उतनी जमीन तुम्हारी हो जाएगी लेकिन तुम्हें सूरज ढलने से पहले मेरे यहां पर उपस्थित होना होगा। यह बात सुनकर राधेश्याम दौड़ पड़ा वह यह सोचकर दौड़ रहा था कि जितना ज्यादा मैं दौडूंगा जिन जगहों पर दौडूंगा वह जमीन मेरी हो जाएगी इसलिए वह दौड़ता रहा। दोपहर हो गई उसे याद आया कि मुझे वापस जाना है लेकिन वह लालच में और दौड़ता रहा।वह एक बगीचे के अंदर चला गया वहां पर वह आराम करने लगा कुछ समय बाद वह वापस जाने लगा वापस जाते समय उसको लगने लगा कि शाम होने वाली है अब तो तेजी से दौड़ना ही पड़ेगा और जमींदार के पास पहुचना पड़ेगा। यह सोचकर वह तेजी से दौड़ने लगा कि शाम होने से पहले यानी सूरज ढलने से पहले जमींदार के पास पहुंच जाऊं वह कुछ ही पल में जमींदार के पास पहुंचने ही वाला होता है तभी सूरज ढल जाता है और वह जमींदार के पास आकर जमीन पर गिर जाता है और जब उसकी नींद खुलती है तो वह समझ जाता है की अब तो सूरज ढल गया है और मेरे लालच ने मुझे आगे नही बढ़ने दिया और मुझे वही पुरानी जिंदगी दे दी। अगर मैं लालच नहीं करता तो जरूर ही में बहुत सी जमीन प्राप्त कर लेता। दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि जीवन में हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिये।

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