सावन सोमवार व्रत कथा Sawan somvar vrat katha in hindi

Sawan somvar vrat katha in hindi

दोस्तों आज हम आपको सावन सोमवार व्रत की कथा सुनाने वाले हैं तो चलिए पढ़ते हैं सावन सोमवार की धार्मिक कथा को
काफी समय पहले एक नगर में एक साहूकार रहता था साहूकार के पास अपार धन संपत्ति थी लेकिन वह अपने जीवन में फिर भी खुश नहीं था क्योंकि उसके कोई संतान नहीं थी वह अक्सर संतान की प्राप्ति के लिए सोमवार का व्रत रखता था. एक दिन माता पार्वती को उस पर दया आ गई और उन्होंने शिव शंकर जी से कहा कि भगवान यह साहूकार काफी दिनों से आपका सोमवार का व्रत रख रहा है आप उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान जरूर दें तभी शिव शंकर ने उस साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान वरदान दे दिया साथ में यह भी कहा की इसका पुत्र केवल 12 वर्ष की उम्र तक जीवित रहेगा.

Sawan somvar vrat katha in hindi
Sawan somvar vrat katha in hindi

कुछ समय बाद साहूकार के घर एक पुत्र ने जन्म लिया साहूकार ने उसे पढ़ाना लिखाना और कुछ सालों बाद उसे अपने मामा के साथ काशी में शिक्षा लेने के लिए भेज दिया और अपार धन संपत्ति देते हुए कहा कि रास्ते में जहां नगर या गाव पड़े वह तुम् यज्ञ आदि पुण्य कर्म करते जाना.काशी जाते समय रास्ते में जहां पर भी उसे नगर गांव दिखें वहां पर वह यज्ञ करवाता. वो एक बार एक नगर में प्रवेश हुआ उस नगर के राजा की लड़की की शादी एक व्यक्ति से हो रही थी वह व्यक्ति एक आंख से काना था लेकिन राजा या उसकी पुत्री को यह बात बिल्कुल भी पता नहीं थी दरअसल उस काना लड़के का पिता छुपकर साहूकार के लड़के से शादी करवा रहा था.वह शादी के बाद साहूकार के लड़के को कुछ देकर वहां से जाने को कह रहा था और फिर उसने अपने काना लड़के के साथ उस राजकुमारी को जिंदगी भर जीवन यापन करने को कह दिया लेकिन साहूकार के लड़के को यह बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी उसने राजकुमारी को छुप कर यह बात बताई की तुम्हारा पति मैं हूं और मैं काशी पढ़ने के लिए जा रहा हूं जिस आदमी के साथ तुम जाने वाली हो वह एक आंख से काना है वह तुम्हारा पति नहीं है तुम्हारा पति मैं हूं.

यह बात राजकुमारी ने राजा से कहा और राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया इधर साहूकार का लड़का काशी में चला गया लेकिन जैसे ही वह 12 साल का हुआ तभी उसकी तबीयत खराब होने लगी लड़के का मामा उसकी तबीयत को देख कर जोर जोर से रोने बिखरने लगा कुछ ही समय में उस साहूकार के लड़के के प्राण निकल गए लेकिन संयोगवश उधर से माता पार्वती और शिव शंकर जी गुजर रहे थे माता पार्वती को यह बात बुरी लगी कि साहूकार का लड़का मर चुका है उन्होंने शिव शंकर जी से आग्रह किया और शिव शंकर जी ने उस साहूकार के बच्चे को लंबी उम्र का वरदान दिया और उसे जीवित किया क्योंकि साहूकार हर सोमवार को व्रत रखता था उससे खुश होकर शिव शंकर ने साहूकार के लड़के को लंबी उम्र का वरदान दे दिया.
साहूकार का लड़का उस नगर से गुजरते हुए अपनी पत्नी को लेते हुए अपने पिता के नगर में जा पहुंचा.अपने पुत्र को जीवित देखकर साहूकार बहुत ही खुश हुआ.
वास्तव में सावन सोमवार का व्रत का बहुत महत्व है हमें सावन सोमवार का व्रत जरूर रखना चाहिए

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