आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध Adhunik shiksha pranali essay in hindi

आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध Modern education system essay in hindi

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी, दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध आप सभी को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बारे में जानकारी देगा दोस्तों हमारा आज का यह आर्टिकल बहुत ही महत्वपूर्ण आर्टिकल है इसे आप पढ़िएगा जरूर क्योंकि हमारे आज के इस आर्टिकल में हमने आधुनिक शिक्षा के उन पहलुओं के बारे में जानकारी दी है जिनमें हम कई तरह का सुधार करके अपने देश को,अपनी इस प्यारी सी दुनिया को बचा सकते हैं और बहुत आगे बढ़ सकते हैं हमारे आज का यह निबंध स्कूल,कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए निबंध लिखने के लिए लिखा गया है साथ में आप इस निबंध के जरिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां जान सकते हैं तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के निबंध को

Adhunik shiksha pranali essay in hindi
Adhunik shiksha pranali essay in hindi

प्रस्तावना-

हम सभी जानते हैं शिक्षा हमारे जीवन के लिए अति आवश्यक है शिक्षा के बगैर मनुष्य पशु के समान होता है पहले जहां शिक्षा गुरुकुल में गुरु दिया करते थे लेकिन आजकल के आधुनिक जमाने में स्कूल कॉलेजों में शिक्षक शिक्षा देते हैं पहले और आजकल के आधुनिक जमाने की शिक्षा प्रणाली में कई तरह का अंतर हमें देखने को मिलता है आधुनिक शिक्षा का हम अगर एक पहलू देखें तो यह हमारे लिए लाभदायक भी है लेकिन इसके दूसरे पहलू को अगर हम देखें तो वास्तव में आधुनिक शिक्षा की वजह से हमारे समाज में,देश मे कुछ समस्याए भी है.
आधुनिक शिक्षा सबसे पहले 1835 को लागू की गई जिसका उद्देश्य था कि सरकारी कर्मचारी पाश्चात्य शिक्षा का प्रयोग कर सकें लेकिन इसमें गरीब और मजदूर वर्गों से इन विशिष्ट लोगों को अलग कर दिया जिस वजह से हमें कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा. आधुनिक शिक्षा के लाभ होने के बाद भी लगभग सौ साल बाद भी शिक्षा का स्तर ऊंचा नहीं हुआ.इस आधुनिक शिक्षा की बुराई महात्मा गांधी ने भी की थी उनका मानना था कि हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को ही स्वीकारना चाहिए.

आधुनिक शिक्षा प्रणाली और गुरुकुलों की शिक्षा प्रणाली-

आधुनिक शिक्षा प्रणाली और हमारे देश की प्राचीन गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली मैं काफी अंतर है पहले जहां बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुल में रहते थे वह लगभग 25 वर्ष तक अपने गुरु के साथ रहते थे और गुरु ही उनके लिए सब कुछ होते थे वह अपनी जीविका चलाने के लिए भिक्षा आदि मांगते थे और उसी से ही उनका पालन पोषण होता था कोई कितना भी बड़ा राजा का पुत्र क्यों ना हो उनमें कोई भी भेदभाव नहीं होता था और उन्हें तीर कमान चलाना, महापुरुषों का ज्ञान एवं संस्कृति का ज्ञान एवं कई तरह के ज्ञान दिए जाते थे जिससे विद्यार्थी का भविष्य उज्जवल होता था वह जीवन में एक अच्छा नागरिक बनता था.आधुनिक शिक्षा के युग में आजकल के लोगों की जिंदगी में बहुत परिवर्तन हुआ है आज आधुनिक शिक्षा प्रणाली स्कूल-कॉलेजों में दी जाती है बच्चा सुबह या दोपहर के समय स्कूलों जाता है और 4 या 5 घंटे पढ़ाई करने के बाद वह घर पर चला आता है घर पर वह एक अलग माहौल में रहता है उसके माता-पिता अपने कार्य में व्यस्त रहते हैं और वह घर पर आकर खेलकूद, TV आदि देखकर अपना मनोरंजन करता रहता है और अपने समय को यूंही नष्ट करता रहता है क्योंकि उसे देखने वाला कोई नहीं होता इस आधुनिक युग में शिक्षा प्रणाली कुछ अलग है इसमें सबसे ज्यादा शिक्षा मशीनरी ज्ञान या वैज्ञानिक ज्ञान की दी जाती है लेकिन नैतिक ज्ञान पर कोई विशेष जोर नहीं दिया जाता है.

वास्तव में नैतिक शिक्षा ही एक इंसान को इंसान बनाती है हमें सही मायने में एक इंसान को सच्चा ज्ञान कराना चाहिए सच्चाई, ईमानदारी,दया,धर्म एवं नैतिक ज्ञान आदि की शिक्षा देनी चाहिए लेकिन आधुनिक शिक्षा के जमाने में लोग सिर्फ पैसा कमाने पर जोर देते हैं वह अपने चरित्र को बनाने पर ज्यादा ध्यान नहीं देते.ज्यादातर जो अध्यापक बच्चों को पढ़ाते हैं वह भी सिर्फ मशीनरी ज्ञान या आधुनिक शिक्षा का ज्ञान ही कराते हैं उनका जोर नैतिकता का ज्ञान देने का नहीं होता, बच्चे का चरित्र बनाने का नहीं होता.ये सबसे जरूरी है कि इस शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसा हो जिससे बच्चों के चरित्र को अच्छा बनाने के प्रति ज्यादा जोर दिया जाए तभी हमारा देश आगे बढ़ सकता है वास्तव में प्राचीन शिक्षा और आजकल की आधुनिक शिक्षा में बहुत अंतर है.

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आधुनिक शिक्षा प्रणाली से अन्य समस्याएं-

वास्तव में आधुनिक शिक्षा प्रणाली से कई समस्याएं सामने आती हैं आज हम देखे हैं तो शिक्षा का मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना ही होता है वह पैसा कैसे भी आए उससे ज्यादातर ना तो किसी शिक्षक को मतलब होता है ना किसी माता-पिता को मतलब होता है.आज हमारे देश में इसी वजह से भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं लेकिन अगर एक शिक्षक शुरू से ही आधुनिक शिक्षा पर ज्यादा जोर न देकर एक इंसान को नैतिक शिक्षा और सत्य, ईमानदारी का ज्ञान कराएं तो वास्तव में देश की तकदीर बदल सकती है.आज हम देखें तो हमारे आधुनिक शिक्षा में पर्यावरण को सुरक्षित करने के विषय हैं जिसमें हम पढ़ते हैं कि जल प्रदूषण,वायु प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण इन सभी प्रदूषणों को खत्म करना हमारा कर्तव्य है हमें इस पर विचार करना चाहिए विद्यार्थी सिर्फ उन बातों को पढ़कर अपना एग्जाम देना ही कर्तव्य समझते हैं लेकिन कोई भी शिक्षक या विद्यार्थी अपने पर्यावरण को बचाने की नहीं सोचता.

आज हम देखें तो हमारे एक शहर में ही कई स्कूल होते हैं कुछ प्राइवेट तो कुछ सरकारी स्कूल भी होते हैं बच्चों को ले जाने वाली कई बसे होती हैं इसके अलावा आज हम देखें तो बहुत सारे तरह-तरह के वाहन हैं जिनके जरिए हम यात्रा कर सकते हैं बच्चे शुरू से ही स्कूल की बसों में या अन्य वाहनों में स्कूल जाता है और लोग कहीं पर भी यात्रा करने के लिए बसों,कारो,मोटर वाहनों का उपयोग करते है इससे वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है जब बच्चा कॉलेज में आता है तो वह ज्यादातर पैदल कॉलेज नहीं जाता उसे भी एक नई मोटरबाइक चाहिए होती है जिस पर बैठकर अपने कॉलेज जाता है जिस वजह से वायु प्रदूषण होता है वातावरण में कई हानिकारक गैसें जाती हैं और इसी वजह से हमारे वातावरण का चक्र बहुत ज्यादा प्रभावित होता है आज हम देखें बरसात के मौसम में बरसात नहीं होती और किसानों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है यह सब पर्यावरण प्रदूषण का ही नतीजा है.आधुनिक शिक्षा प्रणाली में मशीनरी ज्ञान से ज्यादा एक इंसान को इंसान बनाने कि,उसको सत्य और ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की, उसे नैतिक शिक्षा का ज्ञान कराने की और अपनी प्रकृति को स्वच्छ और प्रदूषण रहित बनाने की शिक्षा को दिया दी जाए और उसको फॉलो किया जाए तो वास्तव में हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित होगा और हम देश को आगे बढ़ाने में भी मदद कर सकेंगे.

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