आदर्श विद्यालय पर निबंध Adarsh vidyalaya essay in hindi

adarsh vidyalaya essay in hindi

my ideal school essay in hindi-दोस्तों आज हम आपको एक आदर्श विद्यालय के बारे में बताने वाले हैं हमारा आज का निबंध विद्यार्थियों के लिए बहुत ही हेल्पफुल है कोई भी यहां से अच्छी जानकारी पाने के लिए हमारे द्वारा लिखा ये आर्टिकल पढ़ सकते है तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस आर्टिकल को
विद्यालय जिसमें हम विद्या ग्रहण करने के लिए जाते हैं हमें हमारे शिक्षक शिक्षा प्रदान करते हैं. शिक्षक माता-पिता से भी बढ़कर भगवान के समान समझे जाते है क्योंकि विद्यालय में शिक्षक हमें ज्ञानवान बनाते है.

Adarsh vidyalaya essay in hindi
Adarsh vidyalaya essay in hindi

आजकल हम देखें तो विद्यालय हर गांव हर शहर में बन गए हैं शहर की गली गली में हमें विद्यालय देखने को मिलते हैं जिसमें छोटे से लेकर बड़े बच्चे पढ़ाई करते हैं हर एक बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार होता है इसीलिए बच्चों को पढ़ाया जाता है. लड़के लड़कियों को समान शिक्षा दी जाती है कहने का तात्पर्य यह है कि विद्यालय में हर बच्चे को समान रूप से शिक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए इसके लिए सरकार कई प्रयास कर रही है लेकिन अगर आदर्श विद्यालय की बात करें तो हमें बहुत ही कम देखने को मिलते हैं.आदर्श विद्यालय वह विद्यालय होता है जिसमे सभी सुविधाएं होती हैं और बच्चे अच्छी तरह से पढ़ाई कर सके. शुरुआती प्राथमिक शिक्षा बच्चों को आदर्श विद्यालयों में दी जाए तो वास्तव में उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है क्योंकि वह आदर्श विद्यालयों की सुविधाओं से लाभान्वित होकर अपने जीवन के भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं वास्तव में हर एक विद्यार्थी के जीवन में आदर्श विद्यालय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. आदर्श विद्यालय में कई सारी सुख सुविधाएं होती हैं जो विद्यार्थियों की पढ़ाई में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान निभाती हैं.

आदर्श विद्यालय में आदर्श शिक्षक होते हैं जो बच्चों को सही तरह से पढ़ाई कराते हैं उनका मकसद पैसा कमाना नहीं होता उनका मकसद विद्यार्थियों को अच्छी और उन्नत जानकारी देना होता है और सही तरह से पढ़ाई कराके उनके भविष्य को उज्जवल बनाने का होता है वास्तव में अगर आदर्श विद्यालय हो तो आदर्श विद्यार्थी होते है क्योंकि विद्यालय की जिम्मेदारी विद्यार्थी के प्रति होती है.
आदर्श विद्यालय में आदर्श विद्यार्थी होना चाहिए विद्यालय में अध्यापक बच्चों को दाखिला देने से पहले उनका टेस्ट लेते हैं जिससे अध्यापकों को विद्यार्थियों के बारे में पूरी जानकारी मिलती है कि बच्चा योग्य है या नही. वह तभी अपने स्कूल में दाखिला दिलवाते हैं वास्तव में आदर्श विद्यालय में आदर्श विद्यार्थी होना चाहिये.विद्यार्थियों के अंदर पढ़ाई के प्रति जागरूकता होनी चाहिए तभी एक विद्यालय आदर्श विद्यालय बन सकता है.

एक आदर्श विद्यालय में प्रयोगशालाये भी होनी चाहिए कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनपर प्रयोग करके अध्यापक बच्चों को दिखाते हैं.प्रयोगशालाओं के बगैर विद्यार्थी पढ़ाई तो कर सकते हैं, समझ सकते हैं लेकिन वह प्रैक्टिकल नहीं कर पाते और जिस वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है वह रठा रठाया ही एग्जाम में लिख आते हैं और इसी वजह से एग्जाम में वह गलत लिखकर कई बार फेल हो जाते हैं इसलिए विद्यालय में प्रयोगशाला भी होनी चाहिए.
कंप्यूटर और इंटरनेट की व्यवस्था भी आदर्श विद्यालयों में होनी चाहिए आजकल हम देखें तो बदलते जमाने में कंप्यूटर और इंटरनेट के जरिए की ज्यादातर काम होने लगे हैं अब अगर विद्यालय नई उन्नत तकनीक से कंप्यूटर और इंटरनेट चलाना विद्यार्थियों को नहीं सिखाते हैं तो फिर पढ़ाई का कोई मतलब नहीं निकल पाता. हमें जमाने के साथ चलना चाहिए और विद्यालयों में कंप्यूटर और इंटरनेट सिखाने की शुरुआत से ही अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए तभी एक विद्यालय आदर्श विद्यालय हो सकता है.

विद्यालय में खेलकूद की उचित व्यवस्था होनी चाहिए विद्यालय में सबसे ज्यादा जरूरी पढ़ाई के साथ में खेलकूद की व्यवस्था भी है.स्कूलों में पढ़ाई के बाद कुछ समय दिया जाता है जिससे विद्यार्थी पढ़ाई से फ्री होकर कुछ समय के लिए खेलकूद कर सकते हैं लेकिन अगर खेल का मैदान नहीं होगा तो खेल की उचित व्यवस्था नहीं होती और बच्चों का भविष्य सही नहीं हो सकता.इसके अलावा बच्चों के खेल कूद के लिए खेल खिलौने भी स्कूलों में उपलब्ध हो तो और भी अच्छा रहता है क्योंकि जीवन में पढ़ाई के साथ में खेलकूद भी करना जरूरी है आदर्श विद्यालय में खेलकूद की उचित व्यवस्था होती है.

आदर्श विद्यालय में बालक बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था होती है जिससे किसी को भी कोई परेशानी नहीं होती. आजकल हम देखें तो महिलाओं के साथ बच्चों के साथ कई तरह के दुर्व्यवहार किए जाते हैं आजकल बच्चिया सुरक्षित नहीं रह गई हैं इसलिए जरूरी है कि विद्यालयों में शौचालय की अलग अलग व्यवस्था हो यही एक आदर्श विद्यालय की निशानी होती है.
आदर्श विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था होती है अक्सर कुछ विद्यालयों में देखा जाता है की दो विषय एक ही शिक्षक पढ़ाते हैं लेकिन अगर एक शिक्षक एक विषय में परफेक्ट होता है तो वह अच्छी तरह से पढ़ाई करवा सकता है. एक ही शिक्षक के द्वारा अलग-अलग विषय पढ़ाने से विद्यार्थियों को भी थोड़ी परेशानी होती है और शिक्षक भी सही तरह से नहीं पढ़ा पाता. विद्यालय में अलग-अलग विषय के लिए अलग-अलग शिक्षक होना चाहिए और हर एक विषय के लिए शिक्षक होने चाहिए.

विद्यालयों का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में सच्चाई ईमानदारी,सदाचार के गुण विकसित करने का होना चाहिए क्योंकि वास्तव में यही गुण उन्हें जीवन में बहुत आगे बढ़ा सकते हैं इन्हीं प्रमुख गुणों की वजह से विद्यार्थी सही तरह से पढ़ाई भी करता है और देश के लिए कार्य करता है.अगर वह जो भी करता है पूरी ईमानदारी के साथ अच्छी तरह से करता है तो वह जीवन मे आगे बढ़ता है.विद्यार्थियों को असत्य, हिंसा, कुकर्म, बेईमानी आदि से दूर रहने के सुझाव देना चाहिए तभी एक विद्यालय आदर्श विद्यालय बन सकता है.
आदर्श विद्यालय में छोटे बच्चों के लिए भी विशेष सुविधाएं होती हैं उनकी देखरेख की भी विशेष व्यवस्थाएं होती हैं.बच्चों की देखरेख की सुविधाओं के लिए स्कूलों में आया होनी चाहिए जो बच्चों का सही तरह से ख्याल रख सके ऐसा विद्यालय वास्तव में एक आदर्श विद्यालय होता है.

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