तुलसी के पति शंखचूड और शिवशंकर की कहानी Shankhachur story in hindi

Shankhachur story in hindi

दोस्तो कैसे हैं आप सभी, आज हम आपके लिए लाए हैं शंखचूड की कहानी तो चलिए पढ़ते हैं आज की कहानी

Shankhachur story in hindi
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शंखचूड़ एक दैत्य था जिसने अपने बल के जरिए पूरे देवता,किन्नर,नाग,मनुष्य सभी पर अपना अधिकार कर लिया था लेकिन वह पिछले जन्म में भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा थे लेकिन किसी कारणवश राधा जी ने सुदामा को श्राप दिया कि तुम असुर योनि में जन्म लोगे इस वजह से वह अपनी अगली योनि में शंखचूड़ नामक दैत्य बने.शंखचूड़ तुलसी से शादी करना चाहते थे इन्होंने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और ब्रह्मा जी से वर मांगा कि मैं इतना शक्तिशाली हो जाऊं कि कोई मुझे परास्त ना कर सके इसी वजह से उन्होंने सभी देवता,किन्नर,नाग,मनुष्य पर अपना अधिकार कर लिया था और तुलसी से विवाह कर लिया था यहां तक की उन्होंने स्वर्ग पर भी अपना अधिकार कर लिया था जिस वजह से देवताओं में भी खलबली मच गई थी सभी देवतागण शंकर भगवान से शंखचूड़ का नाश करने के लिए प्रार्थना करने लगे तभी शंखचूड़ से शिव शंकर जी का घोर युद्ध हुआ यह युद्ध सैकड़ों वर्षो तक चलता रहा लेकिन शंखचूड़ का कोई भी बालबाका न कर पाया.

शिव शंकर जी को पता चला कि जब तक शंख चूर्ण के पास रक्षा कवच और उसकी पत्नी तुलसी का सतीत्व है तब तक उसे कोई भी नहीं मार सकता तब भगवान विष्णु एक वृद्ध व्यक्ति का रूप धारण करके शंखचूड़ के पास गए.शंखचूड़ ने इच्छानुसार कुछ मांगने को कहा तभी विष्णु रूपी उस वृद्ध ने शंखचूड़ से उनका रक्षा कवच मांग लिया उसके बाद भगवान विष्णु वहां से चले गए और उन्होंने शंखचूड़ का रूप धारण करके शंखचूड़ की पत्नी तुलसी का सतीत्व भंग कर दिया और इसके बाद भगवान शिव शंकर ने शंख चूड़ का बध कर दिया इस तरह से सभी देवतागण बहुत ही खुश हुए और शिव शंकर की जय जयकार बोलने लगे इस तरह से भगवान श्री कृष्ण के मित्र सुदामा एक दैत्य की योनि से मुक्त हुए.

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