सतयुग का इतिहास और कहानी Satyug history in hindi

Satyug history in hindi

दोस्तो हिन्दू साहित्यों के अनुसार चार युगों में सतयुग सबसे पहला युग है इस योग का तीरथ पुष्कर है इस युग में पाप बिल्कुल भी नहीं होता और पुण्य की मात्रा लगभग सौ परसेंट होती है इस युग की पूर्ण आयु 17 लाख 28 हजार वर्ष होती है और इसमें मनुष्य की आयु 100000 वर्ष होती है सतयुग में भगवान ने कुछ दैत्यों का वध करने के लिए अवतार लिया था सतयुग में भगवान ने मत्स्य अवतार, नरसिंह अवतार और वाराह अवतार लिये थे.

Satyug history in hindi
Satyug history in hindi

मत्स्य अवतार

सतयुग में भगवान ने जो मत्स्य अवतार लिया वह पाप कर्म को दूर करने के लिए अवतार लिया था एक समय की बात है कि मनु तपस्या कर रहे थे तभी वह नदी में से जल चढ़ा रहे थे तभी उनके कमंडल में एक छोटा सा मतस्य आ गया.राजा मनु जैसे-जैसे उस मत्स्य को अपने बड़े बर्तनों में रखते जाते वह मत्स्य आकार में बड़ा होता जाता राजा मनु ने आखिर में उस मत्स्य को समुद्र में छोड़ दिया तो वह कुछ ही पलों में एक लाख योजन बड़ा हो गया था और फिर मत्स्य रूपधारी भगवान विष्णु ने राजा मनु से कहा कि आज से 7 दिन बात यह समुद्र सारे जगत को डुबो देगा.भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके सतयुग में पापियों का विनाश और जगत का कल्याण किया था.

बारह अवतार-

भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष के बध के लिए वाराह अवतार धारण किया.हिरण्याक्ष जो कि हिरण्याकश्यप का भाई था वह संपूर्ण पृथ्वी को पाताल में ले गया था और संपूर्ण पृथ्वी को जल में डुबो दिया था तभी सभी देवी देवताओं की प्रार्थना करने पर भगवान विष्णु ने बारह अवतार लेकर पृथ्वी को पाताल से मुक्त किया और हिरण्याक्ष का वध किया और संपूर्ण पृथ्वी को हिरण्याक्ष के अत्याचारों और कुकृत्य से बचाया.

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नरसिंह अवतार-

भगवान विष्णु ने प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए नरसिंह अवतार लिया था जो कि नाम से ही स्पष्ठ है आधा नर और आधा जानवर. दरअसल प्रहलाद भगवान के भक्त थे वो हमेशा भगवान की पूजा आराधना किया करते थे लेकिन हिरण्यकशिपु केवल अपने आपको ही भगवान मानता था वह अपने पुत्र से अपनी पूजा करने के लिए कहता था लेकिन भगवान विष्णु का भक्त प्रहलाद केवल उनकी धुन में, उनकी भक्ति में हमेशा मगन रहता था जब हिरण्यकश्यप ने यह सब देखा तो उन्होंने अपने पुत्र प्रहलाद को कई तरह से मारने का प्रयास किया लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद के कारण प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हो सका था और अंत में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया क्योंकि हिरण्यकशिपु को बर प्राप्त था कि उसे ना कोई जानवर मार सके ना कोई इंसान इसलिए भगवान ने नरसिंह अवतार लिया और राक्षसों का वध किया और प्रह्लाद को हिरण्यकश्यप के बंधन से मुक्त कराया.
इस तरह से हम देखें तो भगवान विष्णु ने सतयुग में धर्म की स्थापना करने और पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के रूप रचे और धर्म की स्थापना की.

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