नदी की आत्मकथा पर निबंध Nadi ki atmakatha essay in hindi

Nadi ki atmakatha essay in hindi

Nadi ki atmakatha nibandh in hindi-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा निबंध नदी की आत्मकथा पर है जो कि आपके लिए बहुत ही मददगार साबित होगा कोई भी स्टूडेंट हमारे लिखित इस निबंध का उपयोग अपने स्कूल कॉलेज की परीक्षा में लिखने के लिए अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए कर सकते हैं हमारे आज के निबंध नदी की आत्मकथा पर आधारित है जो कि एक काल्पनिक है तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस निबंध को.

Nadi ki atmakatha essay in hindi
Nadi ki atmakatha essay in hindi

मैं एक नदी हूं मेरा जन्म पर्वत श्रंखलाओ के बीच में से हुआ है मैं अपने जीवन में बहुत खुश हूं क्योंकि मैं किसी ना किसी तरह हर एक जीव जंतु के लिए उपयोगी साबित होती हूं लोग मुझे पूजते हैं मेरा सम्मान करते हैं मुझे मैया कहते हैं मैं बहुत सारे नामों से जानी जाती हूं जैसे कि यमुना नदी,गंगा नदी,सरस्वती नदी,ब्रह्मपुत्र नदी.जो हिंदू धर्म में पूजनीय मानी जाती हैं मैं पर्वत श्रंखलाओं के बीच में से निकलती हुई तरह-तरह की ध्वनी करती हुई तेजी से निकलती हूं और बहती हुई मैदानों की ओर आ जाती हु.जीव जंतु अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने शरीर को शीतल करने के लिए मेरा उपयोग करते हैं मैं खुश हूं कि मैं हर एक जीव जंतु के लिए उपयोगी हूं.मेरा प्रियतम समुद्र है मैं हमेशा अपने समुद्र से मिलना चाहती हूं मेरे कई और भी नाम हैं जैसे की नदी,नहर,प्रवाहिनी ,सरिता,क्षिप्रा,तटिनी आदि

ये नाम मेरे अलग अलग रूप,मेरी गति के कारण दिए गए हैं मैं दो तटो के बीच में बहती हूं इसलिए लोग मुझे तटिनी कहते हैं,तेज गति से बहने के कारण मुझे क्षिप्रा कहा जाता है तथा सर सर की आवाज करती हुई चलने के कारण मुझे सरिता कहा जाता है मैं जिस नाम से भी बुलाई जाऊं लेकिन मेरा काम एक ही होता है मैं दूसरे के काम आती हूं,उनकी प्यास भुजाती है और उन्हें जीवनदान देती हु.
मैं नदी ज्यादातर हर गांव में होती हु मेरे पानी का लोग कृषि में उपयोग करते हैं और खेती करके अपनी अपनी जीविका चलाते हैं दुनिया का हर एक जीव मेरे पानी पर निर्भर रहता है मैं हमेशा बहती रहती हूं कभी बरसात के मौसम में मेरा आकार विशालकाय भी हो जाता है जिस वजह से बहुत सारे लोगों को एक जगह से दूसरे जगह जाने में मेरी वजह से परेशानी आती है लोग अपनी सुविधाओं के लिए मेरे ऊपर पुल बनाते हैं और मैं उस पुल के नीचे से होते हुए अपने मार्ग की ओर प्रस्थान करती हैं लेकिन कभी-कभी तो ये होता है कि बरसात के मौसम में पुल भी भर जाता है और लोग बहुत दिनों तक उस पुल से नहीं निकल पाते.

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पुल से तरह तरह के लोग निकलते है जिनमें कुछ अच्छे इंसान भी होते हैं जो मुझे प्रणाम करते हैं मैं उन्हें देखकर बहुत खुश होती हूं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उस पुल से मेरे ऊपर बहुत से हानिकारक पदार्थ मुझ नदी में डाल देते हैं जिससे मेरा पानी अशुद्ध हो जाता है लेकिन मैं हमेशा बहती रहती हूं और अपने पानी को स्वच्छ करती जाती हूं मैं ऐसी ही हूं की कोई मेरे साथ किसी भी तरह का व्यवहार करें मैं उसको कभी जवाब नहीं देती मैं बस चुपचाप उसकी अच्छाई और बुराई को सहन करती जाती हूं और मैं हमेशा आगे बढ़ती चली जाती हूं मैं निरंतर विशाल होती जाती हूं मेरा जल भगवान की पूजा करने के लिए काम में लिया जाता है मैं अपने आप को खुशनसीब समझती हूं कि भगवान के ऊपर यह जल अर्पण किया जाता है साथ में हर अशुद्ध वस्तु को शुद्ध करने के लिए मेरे ही जल का उपयोग किया जाता है.मैं अपने जीवन काल में हमेशा विघ्न बाधाओं को पार करते हुए चलती जाती हूं मैं उनका सामना करती जाती हूं मैं आप लोगों से भी यही कहना चाहती हूं कि आप भी अपने जीवन में विघ्न बाधाओं का सामना करते हुए जीवन में सफलता प्राप्त करें यही मेरी आत्मकथा है.

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