मेरी बस की यात्रा पर निबंध Meri pehli bus yatra essay in hindi

Meri pehli bus yatra essay in hindi

Essay on my first journey by bus in hindi-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,आज का हमारा आर्टिकल Meri pehli bus yatra essay in hindi आप सभी के लिए बहुत ही मनोरंजक होगा इस निबंध का उपयोग विद्यार्थी अपने स्कूल,कॉलेज की परीक्षा में निबंध लिखने के लिए यहां से जानकारी ले सकते हैं और साथ में मनोरंजन के लिए भी इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस निबंध को

Meri pehli bus yatra essay in hindi
Meri pehli bus yatra essay in hindi

हर किसी के जीवन में बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो वह काफी लंबे समय के बाद भी नहीं भूल पाते मेरे साथ भी बचपन में ऐसा ही कुछ हुआ था मेरी पहली बस यात्रा जब मैंने की तो मुझे कुछ अजीब सा अहसास हुआ हम जब भी पहली बार कुछ करते हैं तो हमें थोड़ा डर भी लगता है मेरी पहली यात्रा जो मुझे ध्यान है लगभग 5 साल की उम्र में की थी दरअसल हुआ कुछ यूं था की मेरे फैमिली वालों ने अगले दिन बस के द्वारा कहीं जाने का विचार बनाया जब ये बात मुझे बात पता लगी तो मैं बहुत खुश हुआ मैंने अपने पेरेंट्स से पूछा कि हम कहां जाने वाले हैं तब उन्होंने मुझे बताया और मैं बहुत ही खुशी के साथ उस रात को सोया और रात में सोने के बाद मेरी मां ने मुझे सुबह जल्दी जगा दिया हम सुबह 5:30 बजे तैयार हो गए और कुछ खाने वाली चीजें और कुछ चद्दर अपने साथ रख कर बस स्टैंड के पास जाने लगे. हम लगभग 6:00 बजे पहुंच चुके थे जब मुझे पता लगा कि हम बस से जाने वाले हैं तो मुझे बहुत खुशी हुई और साथ में कुछ डर भी लगा क्योंकि मैं कभी भी बस में नहीं बैठा था मेरे पापा अक्सर अपनी जॉब पर बस से जाया करते थे लेकिन मुझे बस में घुमाने का कभी मौका ही नहीं मिला यह मेरे लिए बहुत ही अच्छा मौका था.

हम जैसे ही बस स्टैंड पर पहुंचे तो कुछ समय बाद मेरे पापा ने मुझे गोद में लेकर बस में चढ़ाया हम सभी बस में बैठ गए मैंने देखा कि सुबह के टाइम भी बस पूरी भरी हुई थी मेरे पापा ने कंडक्टर से बात करके हम सभी के लिए एक सीट ली और हम सभी उसी पर बैठ गए बस लगभग 10 मिनट तक उस बस स्टैंड पर खड़ी रही उसके बाद वह धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार से चलने लगी और आखिर में बस तेजी से चलने लगी मैं खिड़की के पास बैठकर सारे नजारे को देख रहा था सुबह सुबह ठंडी हवा चल रही थी बस में बैठे हुए पेड़ पौधे नजर आ रहे थे जो बहुत ही खुशी का अनुभव दे रहे थे मैं बहुत ही खुश हो रहा था और मम्मी को अपनी उंगली का इशारा करके उन पेड़ पौधे के बारे में बता रहा था मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था हमारी बस तेजी से चलती रही कुछ समय बाद हमारी बस एक पुल से होते हुए गुजरी.

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में पुल से नीचे देख रहा था जब मैंने पुल से नीचे देखा तो मुझे बहुत ही डर लगा मैंने मम्मी से कहा मम्मी क्या यह बस गिर जाएगी मैं बहुत ही घबरा चुका था क्योंकि वहां से नीचे देखने पर मुझे सिर्फ ऊपर से नीचाई दिख रही थी मुझे बहुत ही डर लगा कुछ समय बाद पुल से जब मैंने देखा तो नीचे बहुत सारा पानी भरा हुआ था और ऊपर की पुल पर बस चल रही थी यह नजारा भी थोड़ा डरावना था लेकिन यह नजारा देख कर थोड़ा मुझे अच्छा भी लगा मैं काफी देर तक इस तरह के नजारे देखता रहा कुछ समय बाद एक 30-35 साल की महिला हमारे पास खड़ी हुई थी तभी मेरे पापा ने खुद खड़े होकर उन्हें बेठने को कहा और वो मेरे पास में बेठी उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूछा और मुझसे कुछ बातें भी करने लगी क्योंकि मैं उस समय बहुत क्यूट था उन्होंने मुझसे अपने बारे में पूछा कि तुम कौन सी क्लास में पढ़ते हो तुम्हें क्या-क्या पसंद है मैंने उन्हें अपने बारे में बताया.उस आंटी  ने मेरे लिए एक चॉकलेट निकाल कर दी जो मैंने बड़े ही मजे से खाई.आंटी ने मेरी मम्मी से भी बात की मेरी मम्मी और आंटी बहुत देर तक बातचीत करती रही उनकी बहुत ही गहरी दोस्ती हो चुकी थी लेकिन इन सबसे दूर मैं तो वहां बैठे हुए थे बस से बाहर नजारे देख रहा था.

कुछ समय बाद हमारी बस पहाड़ों से होते हुए गुजरी जिसका नजारा वाकई में देखने लायक था बस में से हमने देखा कि बहुत सारे ऊँट  एक लाइन में जा रहे हैं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा बस से बाहर मुझे कुछ हाथी  भी देखने को मिले जो अपनी सूड ऊपर उठा उठा के बहुत ही अच्छे लग रहे थे फिर लगभग 3 घंटे के लंबे सफर के बाद हमारी बस रुकी मैं अपने मम्मी पापा के साथ बस से उतरकर एक देवस्थान पर पहुंचे जहां पर हमने मंदिरों के दर्शन किये और पैक किया हुआ खाना निकाला और वहां पर खाने लगे शाम को हम घूम फिर कर वापस जाने लगे और बस में सवार हो गए उस समय बस में चलते चलते अंधेरा हो चुका था और रात के 9:00 बजे अपने शहर पहुंचे. मुझे अपनी पहली बस यात्रा में बहुत ही आनंद आया मैं जैसे ही घर पहुंचा तो मेरे आस-पास के दोस्तों को मेने बुला बुलाकर अपनी बस यात्रा के बारे में बता रहा था कि कैसे मैं बस में से बहुत ही तरह तरह के पेड़ पौधों,नदी,तरह-तरह के जानवरों को देखा. मेरी बस यात्रा के बारे में जानकर वो बहुत ही खुश लग रहे थे लगभग 30 मिनट तक बात करने के बाद में घर पर पहुंचा और जाकर सो गया जब सुबह नींद खुल तो भी मेरी आंखो के सामने वह तरह तरह के नजारे नजर आ रहे थे क्योंकि मैं अपनी पहली बस यात्रा को भूल नहीं पा रहा था.

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