एक समाजसेवक की आत्मकथा निबंध Ek samaj sevak ki atmakatha essay in hindi

Ek samaj sevak ki atmakatha essay in hindi

दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल Ek samaj sevak ki atmakatha essay in hindi आपके लिए बड़ा ही प्रेरणादायक हैं इसके जरिए हम जानेंगे समाज सेवक के जीवन के बारे में.ये निबंध केवल जानकारी के लिए लिखा गया हैं.इस निबंध का उपयोग आप यहां से अपने स्कूल,कॉलेज की परीक्षा में निबंध लिखने के लिए जानकारी ले सकते हैं तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस आर्टिकल को.

Ek samaj sevak ki atmakatha essay in hindi
Ek samaj sevak ki atmakatha essay in hindi

मेरा जन्म भारत देश के एक छोटे से गांव में सन 1870 में हुआ था मेरे पिताजी एक स्कूल में टीचर थे.सबसे पहले मैंने स्कूल की पढ़ाई पूरी की इसके बाद मैंने अपनी पढ़ाई आगे भी जारी रखी क्योंकि मैं एक शिक्षित परिवार से था जिस कारण मैं इतना पढ़ पाया.पहले के जमाने में पढ़ाई पर कोई भी विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था मेरे गांव में भी मेरे बराबर पढ़ा-लिखा कोई नहीं था.कुछ समय बाद मेरा पूरा परिवार गांव से शहर रहने लगा वहां पर हम एक किराए के मकान में रहते थे जीवन ठीक तरह से चल रहा था ये वो दौर था जिसमें अंग्रेजों का शासन था.अंग्रेज हिंदूओ पर तरह तरह के अत्याचार करते थे इसी के साथ में हमारे समाज में जैसे कि दहेज प्रथा,बाल विवाह प्रथा,सती प्रथा,विधवा विवाह पर रोक आदि बहुत सी ऐसी कुप्रथाएं थी जिनको मैं बचपन से ही देखते हुए आ रहा था.

उस जमाने में मेरा विवाह बहुत ही कम उम्र में हुआ था.बाल विवाह प्रथा उस समय समाज में फेली हुई थी.बच्चों का विवाह कम उम्र में कर दिया जाता था जिस उम्र में बच्चों के खेलने और पढ़ाई के दिन होते हैं उसी उम्र में बच्चे शादी के बंधन में बांध दिए जाते थे.पढ़ाई के बाद में इस तरह की बहुत सी कुप्रथाओं मुझे समाज में देखने को मिली.समाज में सती प्रथा फेली हुई थी जो बिल्कुल भी ठीक नहीं थी.उस समय लड़कियों की शिक्षा पर भी कोई भी विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था लड़कियों को सिर्फ घर की चार दीवारों के अंदर कैद कर दिया जाता था.वह सिर्फ घर का काम करती थी उनके लिए पढ़ाई का उस समय कोई भी महत्व नहीं समझा जाता था. इसके अलावा लड़कियों की बहुत ही कम उम्र में शादी की जाती थी.लड़का लड़की जो कम उम्र में बहुत ही नासमझ होते थे उन्हें शादी के महत्व के बारे में कुछ भी समझ नहीं थी उनकी भी कम उम्र में शादी करके उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जाता था.इस तरह की बहुत सारी बुराइयां हमारे समाज में चारों ओर फैली हुई थी जब मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की और मैं इस तरह की बहुत सी कुप्रथाओं के बारे में समझा तो मैं अपने समाज से इन बुराइयों को दूर करना चाहता था.मैंने बाल विवाह,सती प्रथा आदि का विरोध किया और हर संभव प्रयास इन कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए किया.मैंने इन कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए कुछ आंदोलन भी किए,रेलियां निकाली इसी के साथ सती प्रथा,बाल विवाह प्रथा को दूर करने के लिए मैंने बहुत प्रयत्न किये क्योंकि यह हमारे समाज के लिए बहुत ही घातक थी.

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मैंने बालविवाह प्रथा को खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक किया और इसके लिए एक आंदोलन के तहत लोगों को बाल विवाह खत्म करने के प्रति जागरुक किया और लोगो को बताया की ये प्रथा किस कारण हमारे इस समाज के लिए नुकसानदायक हैं.हर किसी को पढ़ाई का महत्व बताने के लिए पढ़ाई के बारे में जागरुक किया जिससे हर कोई व्यक्ति अपने बेटे,बेटियों को उचित शिक्षा प्रदान करें और इसके महत्व को समझकर उन्हें जीवन में कुछ करने लायक बनाए जिससे वह जीवन में आगे बढ़ें.
इन सबके अलावा धार्मिक क्षेत्र में हो रही धार्मिक कुरीतियों के खिलाफ मेंने आवाज उठाई.उस समय बहुत से लोग देवी,देवताओं के लिए पशुओं की बलि देते थे इस तरह की कुप्रथाओं को दूर करने के लिए मैंने आवाज उठाई और लोगों को धार्मिक कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रेरित किया और जीवन में सत्य के मार्ग पर चलने को कहा क्योकि यही मानव का सर्वोपरि धर्म है.

जब भी हम कुछ अच्छा करने की कोशिश करते हैं तो बहुत सारी परेशानिया हमें चारों ओर से घेर लेती हैं हमें उन परेशानियों से दूर होने के लिए बहुत प्रयत्न करना पड़ता है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब मैंने समाज में फैली हुई इन कुप्रथाओ के खिलाफ आवाज उठाई तो बहुत सारे लोग मेरे खिलाफ हो गए लेकिन मैंने हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष किया.धीरे धीरे मैं कुछ हद तक समाज की इन बुराइयों को खत्म कर चुका था लोग समझ चुके थे की ये बुराइयां वास्तव में हमारे समाज का नुकसान कर रही हैं.

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