छोटा परिवार सुखी परिवार निबंध chhota parivar sukhi parivar essay in hindi

Chhota parivar sukhi parivar essay in hindi

chhota parivar sukhi parivar essay in hindi-दोस्तों आज का हमारा टॉपिक एक बहुत ही खास विषय पर है Small family happy family essay in hindi.दोस्तों आज हम जिस समाज में रह रहे हैं उसमें परिवार बहुत महत्वपूर्ण है हम सोचते हैं भगवान कहां हैं लेकिन हम नहीं समझते की परिवार में ही भगवान है परिवार में जो मां बाप हैं वह बच्चों की देखभाल करने वाले एक तरह से भगवान ही हैं.

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छोटा परिवार बहुत ही अच्छा परिवार और सुखी परिवार माना जाता है आज हमारे देश में लगभग 135 करोड़ जनसंख्या है जो आजादी के वक्त लगभग 30-40 करोड़ के आसपास थी,जनसंख्या बहुत ही तेजी से बढ़ रही है.बढ़ती हुई जनसंख्या से हमारे देश में काफी कुछ परेशानियां आ रही हैं,इसमें अगर हमने कुछ बदलाव नहीं लाया मतलब छोटा परिवार नहीं हुआ तो हमारा सुखी रहना मुश्किल होगा.

छोटा परिवार ही सुखी परिवार होता है,अगर परिवार छोटा नहीं हुआ तोह हमारे समाज में काफी समस्याए आ सकती है जैसे की-

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रोजगार की समस्याएं-

दोस्तों छोटा परिवार सुखी परिवार होता है और अगर परिवार में 1 या 2 बच्चों की जगह 12-13 बच्चे होने लगे तोह ये परिवार के लिए एक बहुत बड़ी समस्या होगी क्योंकि आज हमारा देश बेरोजगारी से पीड़ित है,अगर वहीं पर परिवार में जन्मे बच्चों की संख्या जादा होने लगी तो लोगों के समक्ष बेरोजगारी की समस्या पैदा होगी,भुखमरी की समस्या पैदा होगी

जिससे हमारे देश के लोग सुखी नहीं रह पाएंगे आज हम देखे तो बहुत सारी सरकारी नौकरियां निकलती हैं लेकिन मिलती किसको है,बहुत ही कम लोगों को क्योंकि जितनी नौकरियां निकलती हैं उससे कई गुना तो हमारे देश में बेरोजगार हैं इसलिए छोटा परिवार होना बहुत जरूरी है,अगर हमारे परिवार में एक से दो बच्चे होंगे तो आप उनका सही से ध्यान रख पाएंगे उनको अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए पैसा खर्च कर सकेंगे उनका कोई अच्छा सा बिजनेस करवाने में मदद कर सकेंगे,उनको अच्छी पोस्ट पर जैसे डॉक्टर इंजीनियर लॉयर कलेक्टर तक पहुंचा सकेंगे क्योंकि आपके पास पैसे की कोई भी प्रॉब्लम नहीं आएगी लेकिन अगर आपके परिवार में बच्चों की संख्या ज्यादा है तो आप ऐसा करने से पहले सौ बार सोचेंगे क्योंकि आपने अपनी एक बच्चे के लिए ऐसा कर भी दिया तो दूसरे के लिए कैसे करेंगे.

आज हमारे देश में वैसे भी पैसे की समस्या है कुछ लोग कहते हैं आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया.अगर खर्चा ज्यादा होगा तो आप अपने बच्चों को अच्छी उंचाइयों पर कैसे पहुंचा सकेंगे इसलिए हमें विशेषकर छोटे परिवार पर ध्यान देने की जरूरत है.

दूसरी ओर हम देखें तो पहले अगर 100 बीगा जमीन थी और अगर 10 भाई हैं तो वह जमीन 10-10 भीगा हो चुकी है और अगर ऐसा ही होता रहा तो सोचिए जमीन किधर जाएगी.पहले के लोग जमीन पर,अपनी खेती पर निर्भर रहते थे

लेकिन आजकल तो जमीन भी नहीं बची.जमीन दिना-दिन कम होती जा रही है क्योंकि जनसंख्या बढ़ती जा रही है हमें ध्यान देना होगा,हमारे परिवार पर और यह बदलाव सिर्फ भारत के हर इंसान की सोच पर निर्भर करता है. परिवार.

परवरिश की समस्या-

अगर छोटा होगा तो हम अपने बच्चों की देखरेख कर सकेंगे.हमारा बच्चा किधर जाता है किसके साथ मिलता-जुलता है,किस तरह के उसके दोस्त हैं उसकी संगत कैसी है इसके बारे में जान सकेंगे जिसके कारण हम उसके आने वाले भविष्य में कुछ परिवर्तन ला सकेंगे और उसे एक अच्छा इंसान बना सकेंगे,वहीं दूसरी ओर अगर हमारा परिवार बड़ा है तो हम हमारे बच्चों का सही से ख्याल नहीं रख सकेंगे क्योंकि सोचिए 10-12 बच्चों का कैसे ख्याल रख सकते है,उन पर कैसे नजर रख सकते है इसलिए बहुत जरूरी है कि हम छोटे परिवार का महत्व समझें.

हम अगर छोटे परिवार के महत्व को समझ गए तो हमारे देश में बहुत सारी समस्याएं नहीं होंगी और हमारा देश विकास करेगा.सभी स्त्री और पुरुषों को भी आजकल बन रहे निरोध का उपयोग करना चाहिए जिससे हम आने वाली बड़े परिवार से बच सके यानी छोटा परिवार बनाने में मदद कर सकें.आज सरकार भी छोटा परिवार सुखी परिवार के महत्व को बताती हैं हमको भी उस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए.छोटा परिवार सुखी परिवार होता है क्योंकि उस परिवार के मां बाप अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभा लेते हैं.

वहीं दूसरी ओर ज्यादा बच्चे होने से हम हमारी जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभा पाते हैं जिससे उन बच्चों का भविष्य भी सही से नहीं हो पाता.हम उनका पालन पोषण सही से नहीं कर पाते जिससे बच्चे शारीरिक रुप से कमजोर होते हैं,हमको समझना होगा की छोटा परिवार ही सुखी परिवार है.

हमने देखा है पुराने जमाने में स्त्री पुरुष बहुत सारे बच्चे पैदा करते थे लेकिन उस समय जनसंख्या कम थी इसलिए कोई भी समस्या नहीं थी लेकिन आजादी के बाद से हमारे देश की जनसंख्या बहुत ही तेजी से बढ़ रही है हम देश के नागरिक हैं और देश के नागरिक का कर्तव्य है की जनसंख्या को रोकने में मदद करें क्योंकि बड़ा परिवार कभी सुखी नहीं होता.

छोटा परिवार ही सुखी रहता है,आज परिवार में माता पिता के पास कोई संपत्ति है और उसके बहुत सारे बच्चे हैं तो संपत्ति के पीछे काफी बर्बाद हो सकते हैं क्योंकि अगर बच्चे हैं तो उनको रहने की व्यवस्था,उनके मां बाप को कुछ हद तक करना होगी और अगर मां-बाप व्यवस्था नहीं कर पाते हैं तो बच्चे उनको अच्छी नजर से नहीं देखते उनके साथ बुरा व्यवहार करते हैं इसलिए हमें समझना होगा.हमें ही नहीं बल्कि भारत के हर एक इंसान को समझना होगा कि छोटा परिवार ही सुखी परिवार है यही हमारे देश को आने वाली समस्याएं महंगाई,बेरोजगारी, जनसंख्या वृद्धि से रोक सकता है.

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