Aaj ki Bhartiya Nari First Loco Pilot Pratibha in Hindi नक्सली इलाके तक train चलने की कहानी

                                                                                                                                                                                          First Loco Pilot Pratibha
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दोस्तों आज की हमारी ये पोस्ट Aaj ki Bhartiya Nari First Loco Pilot Pratibha in Hindi विशेषकर उन महिलाओ के लिए है जो अपने आपको कमजोर समझती है और कुछ भी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती.

कहते है की जिन्दगी में अगर आत्मविश्वास हो,हिम्मत हो तोह एक इन्सान कुछ भी कर सकता है,ऐसा ही एक कारनामा छत्तीसगढ़ की एक औरत ने कर दिखाया,जिसे करने के लिए काफी हिम्मत चाहिए होती है,ये उन औरतो के लिए एक मिशाल है जो कुछ भी करने से डरती है,और हम सबको भी एक प्रेरणा देती है की इन्सान को डरना नहीं चाहिए,तोह चलिए पढते है इनके बारे में की पाइलेट प्रतिभा ने ऐसा क्या किया 

प्रतिभा केबंसोड छत्तीसगढ़ की रहने वाली एक महिला पायेलेट है,जिन्होंने हार्डकोर नक्सली इलाके में पहली बार train चलाई है,बैसे इस तरह के इलाके में जाने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती लेकिन प्रतिभा के पास ये मोका आया तोह वोह मना नहीं कर सकी,क्योकि वोह कभी भी अपनेआपको को कमजोर नहीं समझती.उन्हें खतरों से खेलने का शौक है,वोह सोचती है की अगर कुछ हुआ तोह शहीद ही तोह कहलाऊंगी.

उनको जब ये बात पता चली की उन्हें नक्सली इलाके में ट्रेन चलने को कहा है तोह वोह अपने घर गयी और घर से निकलने से पहले उन्होंने अपने परिवार को इसके बारे में बताया,यह सुनकर परिवार वालो की आखो में आसू आ गए,लेकिन उन्होंने प्रतिभा को रोका नहीं,उनका होसला बढाया.इनके परिवार की जगह और कोई परिवार होता तोह शायद उन्हें जाने से रोकता लेकिन इनके परिवार ने रोकने की वजाए इनकी हिम्मत बड़ाई.

वोह अपने परिवार से विदा लेकर चली,मन में सिर्फ विशवास ही था की वोह अपने passenger को सुरक्छित पहुचाएगी,उनके हाथ में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी,और वोह अपनी ट्रेन के साथ अपने मार्ग की और चल पड़ी,इनकी जगह और कोई होती तोह शायद ये हिम्मत नहीं करती लेकिन इनकी हिम्मत देखिये,ये अपने passanger को लेकर नक्सली इलाके की ओर चल पड़ी.

वोह नक्सली इलाके में ट्रेन लेकर जा ही रही थी की तभी अचानक खवर आई की वोह जहा पर जा रही है वहा से लगभग ५ km आगे का ट्रैक नक्सलियों ने उड़ा दिया है जिसमे 2 जवान शहीद हो गए है,ये सुनकर वोह थोड़ी सहम गयी लेकिन वोह रुकी नहीं बल्कि अपने लक्ष्य की ओर जूनून के साथ बदती गयी,ओर फिर शाम 7 बजे train गुदुम पहुच ही गयी,वोह अपने यात्रियों के साथ सूरकचित पहुच ही गयी.

सोचने वाली बात तोह ये है की कितनी हिम्मत है उनमे उमकी जगह हम होते तोह शायद ऐसा ना कर पाते लेकिन उन्होंने ऐसा कर ही दिया.

वोह कहती है की में इस तरह के इलाके में आने से पहले बिलकुल भी नहीं दरी,मेरे पास आत्मविश्वास था.आप समझ सकते है की एक औरत होकर इतने होसले होना काविले तारीफ़ है.

हर इन्सान को इनसे बहुत कुछ सीखने की जरुरत है,अगर हर इन्सान इतनी हिम्मत रखे तोह हमारे देश में ये नक्सली ढेर हो जाए लेकिन लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते है,वोह नहीं समझते की अगर एक व्यक्ति दर गया तोह ये सिलसिला शायद ही रुकेगा,इसलिए हमें भी इनकी ही तरह हिम्मत से काम लेना चाहिए.

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