सबसे बड़ी कमी inspirational hindi story on changing nature

कुछ समय पहले की बात है एक स्टूडेंट था वह class में बहुत ही होनहार स्टूडेंट था उसके सर उससे बहुत ही खुश रहते थे क्योंकि वह class में बहुत ही होशियार विद्यार्थी रह चुका था लेकिन उसके मां-बाप उस से बहुत नाराज रहते थे क्योंकि उसका थोड़ा तेज़ स्वभाव था और वह किसी का सम्मान भी नहीं करता था,

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उसके मां-बाप ने उसको एक दिन समझाया कि बड़े लोगों का सम्मान करना चाहिए सम्मान करना जरुरी है लेकिन उसको समझ में नहीं आता था वैसे वह क्लास में होनहार था इसलिए स्टूडेंट उसको मानते थे लेकिन उसका स्वभाव किसी को भी पसंद नहीं था,उसने १२th पास किया और उसके उसके बाद उसने स्नातक की उपलब्धि हासिल की लेकिन स्नातक करने के बाद उसको जॉब के लिए दर-दर भटकना पड़ा क्योंकि उसको नौकरी नहीं मिल रही थी,वह काफी जगह नौकरी पाने के लिए गया लेकिन किसी ने भी उसको अच्छी नौकरी नहीं दी उसने अपनी  अंकसूची दिखाई,उसने अंकसूची में अच्छे अंक प्राप्त किए थे लेकिन फिर भी उसको कोई नौकरी नहीं दे रहा था,वह बहुत ही परेशान था,अच्छी नौकरी क्यों नहीं मिल रही है और एक बार वो किसी जॉब के लिए ऑफि में गया हुआ था तो बॉस ने उसकी मार्कशीट चेक की बहुत ही अच्छे नंबर उसमे थे.

वह इंटरव्यू में पास हुआ है लेकिन उसका स्वभाव देखकर उसको नौकरी पर नहीं रखा गया तो वह बहुत ही उदास हुआ और वहां से चला गया रास्ते में जाते समय उसको उसके पुराने गुरु मिले,जो कि उसे आठवीं क्लास में पढ़ाते थे,वोह उसके स्वभाव से परिचित थे,तो उसके गुरू ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने कहा की गुरूजी मेरी परीक्षा में बहुत ही अच्छे अंक आए हैं तो भी मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिल रही है आख़िर इस का कारण क्या है,ये मुझे समझमे नहीं आ रहा है. उन्होंने बोला एक काम कर आज तू मेरे साथ में मेरे घर पर चल तो गुरु उसको अपने घर की ओर ले जाने लगे घर पर जाकर गुरु ने कहा चलो मैं आज तुझे चावल खिलाता हूं गुरु ने चावल पकाने के लिए रख दिए और उसके पास आकर बैठ गए,कुछ समय बाद गुरूजी ने उससे कहा कि एक काम कर जाकर देख कि चावल पके या नहीं पके,उसने रसोई में जाकर चावल के दानों को हाथ में लेकर देखा तो चावल पक चुके थे.

वापस आकर गुरुजी से कहा गुरुजी चावल पक चुके हैं तो गुरूजी ने कहा तुमने कैसे जाना कि यह चावल पक चुके हैं तो वह कहता है गुरुजी मैंने चावल के कुछ दाने हाथ में लिए और मुझे पता चला कि चावल के दाने पक चुके हैं तो गुरु जी उससे कहने लगे कि जिस तरह से तूने जाना की  कुछ चावल के दाने पक चुके हैं तो बाकी के चावल भी पक चुके हैं,उसी तरह से तेरी एक बुरी आदत तुझे कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलने देती जैसे की जब भी तू किसी नौकरी के लिए अप्लाई करता है और ऑफिस में जाता है तो तुझमें उपस्थित सिर्फ एक अवगुण तुझे नौकरी नहीं करने देता. तुझे कोई भी नौकरी पर नहीं रखता यानि कि तुझमें एक अवगुण है,तूझे सही से बातचीत करना नहीं आता,तू हमेशा किसी का सम्मान नहीं करता,सिर्फ इसी कारण सामने वाला व्यक्ति तेरे अंदर की बुरी बातो को पहचान लेता है और तुझे नौकरी पर नहीं रखता है,इसलिए तुझे अगर जिंदगी में वाकई में आगे बढ़ना है और तुझे जिंदगी में एक अच्छी नौकरी पाना है तो सबसे पहले तू अपने स्वभाव को बदल क्योंकि जब तक इस तरह का बुरा स्वभाव तेरा रहेगा तुझे कोई भी एक अच्छी नौकरी पर नहीं रख सकेगा.

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