शेर की पहचान inspirational short stories in hindi

एक बार एक शेर का बच्चा खो गया तोह वह भेड़ो के झुण्ड में मिल गया तोह वह शेर का बच्चा उन्ही भेड़ो के साथ रहता उन्ही के साथ सोता उन्ही के साथ खाना खाता,वह उन सभी भेड़ो को अपना परिवार समझने लगा .एक दिन उस जंगल में एक शेर ने शिकार के लिए आक्रमण कर दिया तोह सभी जानवर भयभीत हो गए और इधर उधर भागने लगे .

शेर ने गोर से देखा की एक शेर का बच्चा उन भेड़ो के झुण्ड के साथ खड़ा हुआ था तोह शेर ने उससे कहा की पांच साल पहले मैंने अपने एक बच्चे को खो दिया था,तुम मेरे बच्चे हो मेरे साथ चलो .
तब शेर का बच्चा बोला की नहीं में तोह भेद हु में तेरा बच्चा कैसे हो सकता हु.तोह शेर कहने लगा की तेरी सूरत मेरे जैसी लगती है या इस भेड की तरह .
तोह वह बोला कि क्या पता मेने तोह कभी मेरी सूरत नहीं देखि.
इस पर शेर कहने लगा कि चल पानी के पास चलते है और वे दोनों पानी के पास जाते  है और शेर lकहता है कि अब बता कि तू मेरे जैसा दीखता है या फिर इन भेड़ो जैसा तोह वह बच्चा बोला कि हां में तोह तुम्हारे जैसा ही दीखता हु लेकिन में तुम्हारा बच्चा नहीं हु .क्योकि मेरा परिवार तोह ये है .मेरे मां फूफा सभी लोग मेरे ये है क्योकि ये मेरी हमेशा मदद करते है.
तोह शेर कहता है कि अगर तुझे पहचान ही करनी है अपने और परायो कि तोह तू जोर से दहाड़
तोह वह जोर से दहाड़ता है तोह देखता है कि सारी भेड़े भाग चुकी थी और शेर वही पर खड़ा रहता है ,इसके बाद वह बच्चा उस शेर के साथ चला जाता है .
दोस्तों अगर आप कोई शेरो जैसा work करते है तोह याद रखे आपको शेरो कि जरुरत पड़ेगी ,time आने पर आपको पता चल जाएगा कि आपका कौन अपना है कौन पराया .
याद रखिये शेरो कि दोस्तों शेरो से ही होती है और भेड़ो कि दोस्ती भेड़ो से होती है.अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आये तोह इसे शेयर जरूर करे.

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