मैं हिमालय बोल रहा हूँ आत्मकथा निबंध Main himalaya bol raha hoon atmakatha

himalaya ki atmakatha in hindi

मैं हिमालय बोल रहा हूं मैं सदियों से आपको खुशियां देता रहा हूं, आपके देश की सुंदरता बढ़ाता रहा हूँ मैंने आपको क्या नहीं दिया शुद्ध वातावरण , स्वच्छता और मेरे ऊपर उगाए हुए फल आप लोग बड़े स्वाद से खाते हो फिर आप मुझे नष्ट क्यों करते हो मैं आप लोगों से कहता हूं कि जिस प्रकार आपने उस फल का स्वाद लिया है उसी प्रकार आपके आने बाले बच्चे भी उस फल का स्वाद चख सकें ।

मुझसे पहले लोग प्यार करते थे मेरी हिफाजत करते थे लेकिन आज की पीढ़ी के लोग क्यों बदल रहे हैं क्यों मेरी रक्षा नहीं कर पा रहे हैं? क्यों इस अच्छे वातावरण को मिटा रहे हैं? मैं पूछना चाहता हूं लोगों से जो मेरी चोटियों पर घूमने के लिए आते हैं और मेरी चोटियों पर लगे हुए पेड़ पौधे और मेरी चोटियों को नुकसान पहुंचाते हैं मैंने उनका क्या बुरा किया है ।

Main himalaya bol raha hoon atmakatha
Main himalaya bol raha hoon atmakatha

आज मैं लोगों से बोलता हूं कि मुझे बचाओ क्योंकि मैं आप लोगों को बर्फ जैसे पहाड़ की सुंदरता देता हूं मैं आप लोगों से कहता हूं कि मेरे आस-पास स्वच्छ वातावरण बनाओ जिससे यह प्रकृति स्वच्छ बनी रहे और किसी तरह का कोई प्रदूषण न फेल सके और मै हमेशा सुंदरता के वातावरण में रहूं ।

मुझे बहुत अच्छा लगता है जब आप मेरी चोटियों पर घूमने आते हो और अपनी छुट्टियों के दिनों में अपनी इस जिंदगी को खुशनुमा जिंदगी बनाते हो. मैं खुश होता हूं जब मेरी चोटियों पर चढ़कर अपनी खुशनुमा जिंदगी को खुशियों से भर कर आप आनंद उठाते हो ।आनंद भरी जिंदगी को जीने के लिए आपको मेरी सुंदरता बनाए रखनी होगी । आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना होगा जो लोग पेड़ काटते हैं चोटिया नष्ट करते हैं उन लोगों को रोकना होगा । उनको भी सुंदरता को बचाए रखने के लिए कहना होगा ।

जब मेरी सुंदरता नहीं रहेगी तो आप कहां पर घूमने के लिए जाओगे. सुंदरता को बनाए रखने के लिए मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप इन चोटियों को सुरक्षित रखें क्योंकि मैं आपको तब सुंदरता दे पाऊंगा जब आप मेरी सुंदरता को खत्म ना होने देंगे. मैं हमेशा बर्फ से ढका रहता हूं और लोगों को खुशियां देता हूं ।

मैं एक पहाड़ नहीं हूं मैं कई पहाड़ों से मिलकर बना हूं मेरे ऊपर तो भगवान भी रहते हैं और कई साधु तपस्या करते हैं मेरी गुफाओं में भी कई साधु तपस्या करते हैं. मैं एक स्वच्छ वातावरण देता हूं लोग क्यों मुझे नष्ट कर देना चाहते हैं? क्या वह सुंदरता को पाना नहीं चाहते? क्या वह सुंदरता अपने आने वाले भविष्य के लिए नहीं चाहते?

लोगों के मन में जो आता है वही करते हैं उनको यह पता नहीं होता कि क्या अच्छा है क्या गलत है वह पर्वत पर आकर हिमालय को गंदा करते हैं जहां आप घूमने जाते हो उस जगह को गंदा करना कहां तक ठीक है बल्कि आपको उसकी सुंदरता के लिए और अच्छे काम करना चाहिए जिससे कि आपकी आने वाली पीढ़ी भी उस सुंदरता का मजा ले सकें ।

मैं पर्वत बोल रहा हूं कुछ सालों पहले में चमकता था, मुस्कुराता था लेकिन यह मुस्कुराहट ना जाने कहां चली गई है । अगर आप मुझे चमकते हुए मुस्कुराते हुए देखना चाहते हो तो मेरे बारे में सोचो, मेरी सुंदरता बनाए रखो. मैंने इतनी लंबी लंबी चोटिया दी है आप उन चोटियों का आनंद उठाओ और उन चोटियों को बचाए रखो । चट्टानों को मत तोड़ो मुझे नुकसान पहुंचाकर आपको क्या फायदा होने वाला है अगर आप मेरी सुंदरता और भी बढ़ाना चाहते हो तो मुझे नष्ट मत करो ।

अगर आप मुझे नष्ट करोगे तो भूकंप आने का खतरा आप पर मंडराता रहेगा इससे आपको नुकसान होगा और मुझे भी नुकसान होगा । मैं हिमालय गिरिराज पर्वत के रूप में भी जाना जाता हूं मेरे पर्वत पर तो भगवान भी वास करते हैं तो आप मुझे नुकसान क्यों पहुंचा रहे हो । कई धार्मिक स्थल मेरे ऊपर बने हैं जेसे की बद्रीनाथ , केदारनाथ , अमरनाथ. जहां पर आप लोग घूमने के लिए आते हो ।

कई लोग जिस जगह पर घूमने के लिए जाते हैं उस जगह को गंदा नहीं करते बल्कि उस जगह की स्वच्छता बनाए रखते हैं और उस जगह को स्वच्छ बनाए रखना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य भी है.हमे सोचना चाहिए की आज हम वहां पर घूमने के लिए गए हैं कल हमारे बच्चे भी वहां पर घूमने के लिए जाएंगे इसलिए हमें हिमालय को स्वच्छ रखना चाहिए, किसी भी तरह का नुकसान नही पहुचना चाहिए.

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